

बलौदाबाजार:
नगर में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आज लवन रोड स्थित प्रतिष्ठित किराना व्यापारी श्री विनोद अगिचाई जी की दुकान में भीषण आग लगने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। प्राथमिक अनुमान के मुताबिक, इस भयावह अग्निकांड में लगभग पांच करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों और उसकी मुस्तैदी पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
आग की लपटें तेज, पर सिस्टम ‘नॉन-रिस्पॉन्सिव’!
दुखद और आक्रोशित करने वाला विषय यह रहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी काफी देर से पहुँची। जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर आईं, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। यदि समय रहते फायर ब्रिगेड पहुंच जाती, तो शायद नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
व्यापारियों का सीधा सवाल: “जब शहर जल रहा हो, तो दमकल विभाग को नींद से जागने में इतना वक्त क्यों लगता है?”
*शहर से बाहर क्यों है फायर स्टेशन? प्रशासनिक उदासीनता चरम पर*
बलौदाबाजार तेजी से विकसित हो रहा जिला मुख्यालय है, लेकिन आज भी यहाँ की फायर ब्रिगेड व्यवस्था शहर से बाहर से संचालित हो रही है। ट्रैफिक और दूरी के कारण दमकल वाहनों को घटना स्थल तक पहुंचने में लंबा समय लगता है।
व्यापारियों, सरकारी कार्यालयों और आम नागरिकों की सुरक्षा को ताक पर रखकर व्यवस्था को शहर से बाहर रखना सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
नगर के भीतर एक स्थायी और आधुनिक फायर स्टेशन की स्थापना अब कोई मांग नहीं, बल्कि अनिवार्य जरूरत बन चुकी है।
चेंबर ऑफ कॉमर्स में भारी रोष, आंदोलन की सुगबुगाहट
इस घटना के बाद से ‘चेंबर ऑफ कॉमर्स’ और बलौदाबाजार के समस्त व्यापारी वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है। व्यापारियों का कहना है कि वे टैक्स देते हैं, व्यापार से शहर को पहचान देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ असुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही मिलती है।
*व्यापारी संघ ने प्रशासन से दो टूक मांग की है:*
बलौदाबाजार नगर के भीतर तत्काल आधुनिक फायर स्टेशन की स्थापना की जाए।
हाईटेक संसाधनों और पर्याप्त फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित हो।
*बड़ा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि या उग्र आंदोलन का इंतजार कर रहा है?*
एक के बाद एक हो रही आगजनी की घटनाएं इस बात का अलार्म हैं कि बलौदाबाजार एक बड़े खतरे के मुहाने पर बैठा है। आज तो करोड़ों की संपत्ति खाक हुई है, कल को अगर कोई बड़ी जनहानि होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
क्या प्रशासन तब जागेगा जब व्यापारी और आम जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगी, या फिर इस बार कोई ठोस और तत्काल कदम उठाया जाएगा? जवाब का इंतजार पूरे बलौदाबाजार को है।




